बिहिबार, जेठ १५, २०७७
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कालापानी और भारतीय कूटनैतिक असक्षमता

कालापानी और भारतीय कूटनैतिक असक्षमता

हाल हि मे नेपाल सरकार ने अपना राजनैतिक और प्राशासनिक नक्सा सार्वजनिक किया जिसमे आधिकारिक तौर से हि कालापानी,लिम्पियाधुरा और लिपुलेक को अपने नक्से मे शामिल कर के विश्व मानचित्र मे नेपाल के नक्से को बढाकर दिखा दिया।दरअसल कुछ महिने पहले भारत ने लिम्पियाधुरा ,कालापानि और लिपुलेक को अपने नक्से मे शामिल किया जो कि अवैधानिक,गैरन्यायिक और असंवैधानिक कदम था इतना हि नहिं इस ने भारतीय कूटनैतिक असक्षमता को भी जगजाहेर कर दिया।

भारत और नेपाल कि सिमा का निर्धारण का निर्णायक आधिकारिक दस्तावेज सुगौली सन्धि है जिस से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह जमीन नेपाल से ताल्लुकात रखती है भारत ने इस जमीन को अपने नक्से मे शामिल कर के बहुत बडी गलती कर दी क्यों कि संयुक्त राष्ट्र संघ,विश्व अदालत मे भारत यह कभी साबित नहिं कर सकता है कि यह जमीन भारत से सम्बन्ध रखती है जब नेपाल देश बना तब भारत या हिन्दुस्तान भी नहिं बना था वर्तमान भारत अनेक टुकडों मे बिखरा हुआ था तब बिखरे हुए उन देशों पर अंग्रेजों ने आ कर के राज किया।EAST INDIA COMPANY के सियासी काल मे वहाँ के जनता वर्तमान भारतीयों का जनजीवन बहुत बुरा था यहाँ तक कि सार्वजनिक स्थल,सभाओं वा अन्य किसि विशेष स्थान मे  INDIANS  AND DOGS ARE NOT ALLOWED लिखकर बोर्ड टाँगा जाता था।जिस वक्त अंग्रेज भारत मे राज कर रहे थे उस वक्त नेपाल के अन्दर कुमाउँ,गढवाल,सिक्किम,आसाम के भूभाग सहित पुरव की ओर टिस्टा और पश्चिम कि ओर कांगडा तक नेपाल का साम्राज्य फैला हुआ था इसलिए आज भी भारत के कै राज्यों मे नेपाली भाषियों का बाहुल्य है ।

  कहने के लिए तो भारत नेपाल को अपना मित्र राष्ट्र कहता है पर व्यवहार देखें तो वो पिछले कुछ दशकों मे बार बार नेपाल का दिल दुखाया जा रहा है ।वो चाहे बार बार कि नाकाबन्दी हो या नदियों पर किए गए असमान सन्धि इस से भारतको मित्र मानना भी मुश्किल है और वर्तमान परिवेश मे नेपाल और भारतका सम्बन्ध सिर्फ व्यापारिक है इसको मित्र सम्बन्ध मानना मुश्किल है ।मित्र तो वह होता है जो तकलिफों को कम करे पर भारत नेपाल कि तकलीफको सिर्फ बढाने का काम कर रहा है।

अंग्रेजों ने बार बार नेपाल पर हमला किया पर हर बार नेपालियों ने अंग्रेजों को पटखनी दि और नेपाल मे इस्ट इन्डिया कम्पनी कब्जा नहिं जमा सकी और नेपाल कभी किसि के उपनिवेश या कब्जे मे नहिं गया इसिलिए नेपाल मे स्वतन्त्रता दिवस मनाया हि नहिं जाता क्यों कि नेपाल प्राकृतिक रूप से हि एक सार्वभौम और स्वतन्त्र राष्ट्र है।भारतके उत्तराखण्ड के देहरादून मे नेपाली के वीर गाथाओं का स्मारक है ।तात्कालिक अंग्रेजों ने भी नेपाली गोर्खा वीरोंका सम्मान किया है और विश्व के बहुत देशों मे गोर्खालियों कि वीरता और उनकी बहादुरी के किस्से और स्मारक हैं।अंग्रेज पूरे नेपाल पर कब्जा तो नहिं जमा सके पर नेपाल के कुछ भूभाग लूट लिए जिससे नेपाल कि सियासत कि लगभग आधी जमीन अंग्रेज ले गए पर लिम्पियाधुरा कालापानी और लिपुलेक के क्षेत्र नेपाल के हि हैं यह प्रमाणित इसलिए होता है कि उस क्षेत्र मे निर्वाचन करवाना, कर उठाना सब नेपाल कि ओर से हि होता रहा बाद मे जैसे जैसे सुविधायुक्त जमाना आता गया धीरे धीरे वहाँ से बस्ती भी उठती गइ और इसि का फाइदा उठाकर भारत ने अपनी सेना को उस इलाके मे भेजा जो कि नेपाल भारत और चीन के बार्डर वाला नेपालका हिस्सा है।भारत और नेपाल के दोस्ताना सम्बन्ध के चलते नेपाल ने सोचा चलो मित्र राष्ट्र है थोडी सि हमारी जमीन को अस्थायी प्रयोग करता है तो क्या हुआ इस विषय पर कूटनैतिक वार्ता तब भी हुई थी तब नेपाल के राजा महेन्द्र थे ।भारतीय सेनाको शरण के तौर पर रहने के लिए उस जमीन को दिया गया पर जब कुछ महिने पहले भारत ने उस जमीनको अपने नक्से मे शामिल किया वहाँ से मामला बिगड गया और नेपाल और भारत के रिश्तों मे खटास आ गयी नेपाल के कूटनैतिक पहल को जब भारत ने नजरअन्दाज कर दिया तो नेपाल ने भी अपनी जमीन को नक्से मे शामिल कर लिया ।कहने के लिए तो भारत नेपाल को अपना मित्र राष्ट्र कहता है पर व्यवहार देखें तो वो पिछले कुछ दशकों मे बार बार नेपाल का दिल दुखाया जा रहा है ।वो चाहे बार बार कि नाकाबन्दी हो या नदियों पर किए गए असमान सन्धि इस से भारतको मित्र मानना भी मुश्किल है और वर्तमान परिवेश मे नेपाल और भारतका सम्बन्ध सिर्फ व्यापारिक है इसको मित्र सम्बन्ध मानना मुश्किल है ।मित्र तो वह होता है जो तकलिफों को कम करे पर भारत नेपाल कि तकलीफको सिर्फ बढाने का काम कर रहा है।जहाँ जहाँ नेपाल कि सिमाएं भारत से जुडी हैं वहाँ वहाँ भारत कि ओर से घुसपैठ और अतिक्रमण आज भी जारी है।सिमा पर रखे गए जंगे पिल्लर को खिसकाना सिमावर्ती नेपालियोंको अपमानित करना प्रताडित करना यह सब काम भारतीय पक्ष के ओर से होता आ रहा है पर मन्त्री प्रधानमन्त्री बन्ने के लोभ मे नेपाल के कुछ मुट्ठीभर नेताओं ने इस बात पर चुप्पी साधी इस से नेपाल के राजनैतिक नेताओं के राष्ट्रभक्ति पर भी सन्देह करना मुनासिब है ।नेपाल कि जनता इस बात का विरोध तो करती है पर नेपाल पुलिस के बल के आगे नेपाली जनता भी यह अन्याय वेवश और लाचार हो कर सहने मे वाध्य हो जाती है ।ऐसा भी इसलिए हुआ क्यों कि जिस जिस नेता ने भारतका विरोध किया वो या तो मारा गया नहिं तो सत्ताच्युत कराया गया यहाँ तक कि नेपाल कि कुछ जनता नेपाल के राजदरबार हत्याकाण्ड के लिए भी भारत कि ओर हि इसारा करती है हालांकी यह किस्सा रहस्य बना हुआ है।

आज का वक्त अलग है संसार भर नेपाल कि अपनी पहचान है नेपालियों ने दुनियाँ भर मे अलग अलग क्षेत्रों मे अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर के खुदको अब्बल ठहराया है ।नेपाल कि खूबसूरती कि सारी दुनियाँ कायल है और नेपाल कि जनताओं के जीवन स्तर मे भी व्यापक सुधार आया है नेपाल कि गोरखा सैनिक कल भी खूंखार थी अब और भी खूंखार हो गयी है । सोसियल साइट्स, इन्टरनेट के माध्यम से आज नेपाल अपनी समस्याओं को विश्व मे रख सकता है और अन्तर्राष्ट्रिय स्तर मे भूपरिवेष्ठित देशों को जो सुविधा और अवसर दिया जाता है उस न्याय पर नेपाल कहाँ कहाँ वंचित हो रहा है ? उस को भी परख कर के मसले का हल निकाल सकता है।अगर इतिहास देखें तो नेपाल और भारत हमेशा दोस्त रहे हैं चाहे श्रीराम हों या बुद्ध दोनों के प्रसंग मे नेपाल भारत साथ हैं।नेपाल और भारत कि संस्कृति,सभ्यता और धर्म मे भी बहुत समानताएं हैं और सामान्य जनता बिच आज भी बहुत अच्छे सम्बन्ध हैं पर पिछले कुछ दशकों मे भारतीय कूटनीति नेपाल के उपर कुछ गलत तरिके से प्रयुक्त हो रही है यह बात भारतीय आम सर्वसाधारण जनताको भी जानना जरुरी है क्यों कि नेताओं कि गल्ती कि सजा दोनो देशों के मासुम जनता को नहिं मिलनी चाहिए और दोनो मुल्क के जनता के जो आपसी सम्बन्ध हैं वो सुमधुर हि रहने चाहिए ।नेपाल भारत को चाहिए कि सुगौली सन्धि अनुसार सारे बोर्डर को सिल करे और नेपाल भारत आने जाने के लिए भी पासपोर्ट विजा अनिवार्य किया जाए क्यों कि खुला सिमाना के चलते नेपाल और भारत दोनो देशों को सुरक्षा संबंधित समस्याओं का सामना करना पड रहा है वहिं भारतीय दुश्मन पक्ष भी नेपाल के रस्ते भारत मे आतंकवादी गतिविधि फैलाने मे सक्रिय हो सकता है इस बात को दोनो देश अगर गम्भीरता से लें तो यह बात दोनो देशों के लिए फायदेमन्द है ।नेपाल छोटा देश है इसलिए नेपालको अपमानित करने का दुस्साहस भारत ना हि करे तो यह बात बेहतर हो सकती है।

भारतीय मिडिया मे नेपाल और भारत कि शक्तियों का तुलना कर के नेपाल को नीचा दिखाया जा रहा है भारतीय मिडिया वाले यह बात क्यों नहिं समझते अगर लड भी लिया तो नेपाल कमजोर नहिं है क्यों कि अगर भारत नेपाल से दुश्मनी करता है तो भारत के सभी दुश्मन नेपाल के दोस्त बन जाएंगे और लडाइँ तो कभी भी समस्याका समाधान नहिं है।सिर्फ मनिषा कोइराला के एक ट्विट से अगर पूरा भारत हिल सकता है तो सोचो अगर आधे लाख गोर्खा सैनिक जो कि भारत कि रक्षा के लिए तैनात हैं वो भडक गए तो क्या होगा?

भारतीय मिडिया जिस तरह से एकपक्षीय ढंग से इस मसले को उछाल कर नेपालियों को अपमानित कर रही है उससे एक बात तो यह भी सिद्ध होता है कि कोई ना कोई पक्ष तो है भारत मे जो नेपाल और भारत के सम्बन्धों को बिगाड कर भारतको समस्या मे लाना चाहती है ऐसे आत्मघाती तत्वों से अगर भारत सजग रहे तो यह उसके लिए हितकर है।लाखों नेपाली लोग भारत मे काम करते हैं,विभिन्न क्षेत्र मे नेपाली लोग सम्मानित पेशे से जुडे हुए हैं महन्त मठाधीश मण्डलेश्वर के रूप मे हैं,डेनी,उदितनारायण झा,मनिषा कोइराला इसके उदाहरण हैं यह तो सबको मालुम है पर लाखों भारतीय नागरिक भी नेपाल मे मजदूरी कर रहे हैं व्यापार कर रहे हैं अगर हालात बिगडते हैं तो नेपालका अकेला कुछ नहिं जाता है भारतको भी बहुत नुकसानी झेलनी पडेगी।भारतीय मिडिया मे नेपाल और भारत कि शक्तियों का तुलना कर के नेपाल को नीचा दिखाया जा रहा है भारतीय मिडिया वाले यह बात क्यों नहिं समझते अगर लड भी लिया तो नेपाल कमजोर नहिं है क्यों कि अगर भारत नेपाल से दुश्मनी करता है तो भारत के सभी दुश्मन नेपाल के दोस्त बन जाएंगे और लडाइँ तो कभी भी समस्याका समाधान नहिं है।सिर्फ मनिषा कोइराला के एक ट्विट से अगर पूरा भारत हिल सकता है तो सोचो अगर आधे लाख गोर्खा सैनिक जो कि भारत कि रक्षा के लिए तैनात हैं वो भडक गए तो क्या होगा? भारतीय लोग यह जान लें कि अंग्रेजों के खिलाफ लडे हुए भारतीय स्वतन्त्रता के लडाइँ मे गान्धी जि को और भारतीय जनताको नेपाल ने सहयोग किया था और नेपाल से विश्वेश्वरप्रसाद कोइराला जो कि बाद मे नेपाल के प्रधानमन्त्री बने उनके साथ नेपाल के लोग भी उस लडाइँ मे भारत कि ओर से लड्ने गए थे।पौराणिक काल मे भी नेपाल देश का अलग अस्तित्व था इसका प्रमाण स्कन्दपुराणका हिमवत्खण्ड है जहाँ भगवान शिव माता पार्वतीको बताते हैं कि

नेपाल देशो जननी जगज्ज्येष्ठो हिमालयः
अर्थात् हे पार्वती नेपाल देश जो है वह जगत का ज्येष्ठ देश है और यह देश स्वयं मे हिमालय जैसा अटल और श्रेष्ठ है मानव विकास का क्रम नेपाल से हि हुआ है शालग्राम इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है । समग्र मे भारत को चाहिए कि वो नेपाल के जमीन पर अपना दावा छोडे और शक्ति प्रदर्शन न करे जिससे नेपाल और भारत के रिश्ते भी बने रहें और नेपाल को भी कोइ क्षति न पहुँचे इससे भारतीय कूटनीति भी विश्व मे शर्मसार होने से बचेगी। नेपाल कि जमीन पर जिस सडक को बनाने का दुस्साहस भारत ने किया है उसके लिए भारतको क्षमा मागनी चाहिए और उस रस्ते से मानसरोवर जाते वक्त नेपाल के कानुन का पालना कर के उसका प्रयोग करे।अगर भारत नेपाल को सच मे अपना भाइ मानता है तो वह अपने छोटे भाईको लूटने का काम ना करे ।बडा भाइ छोटे को लुटे और भाइ भी कहे तो छोटे भाइको भी ऐसे सम्बन्ध कि कोई जरुरत नहिं रहेगी।मदोन्मत्त भारतीय कूटनैतिक पक्ष को समय मे सद्बुद्धि मिले और वो अपनी गलती को न दोहराकर उसको सुधारे ऐसी प्रार्थना हम भगवान पशुपतिनाथ और भगवान मुक्तिनाथ से करते हैं।
जय नेपाल

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